
"कभी आ कर रुला जाते"
दिल की उजड़ी हुई बस्ती,कभी आ कर बसा जाते
कुछ बेचैन मेरी हस्ती , कभी आ कर बहला जाते...
युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर ,
रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
कुछ बेचैन मेरी हस्ती , कभी आ कर बहला जाते...
ReplyDeleteयुगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर
nice
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteबनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ReplyDeleteख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
nice one
too good
ReplyDeleteरात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
ReplyDeleteदुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
ReplyDeleteतेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........waah kya baat hai!!
बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
ReplyDeleteवीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है
good one seema jee like it
Regards
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteबनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
sundar rachna
रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
ReplyDeleteदुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
sundar
liked it mam
ReplyDeleteRegards
ashok
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteBeautiful composition mam
Regards
nice one.....as always seema jee
ReplyDeleteRegards
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
ReplyDeleteबेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
very nicely written mam
Regards
युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर ,
ReplyDeleteरात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
nice composition
regards
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteबनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
Shabdo ka maaya jaal
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteबनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
last 2 lines are heart of poem.....just too good
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
ReplyDeleteबनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
ReplyDeleteबेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........too good
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
ReplyDeleteबेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते
too good
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