Wednesday, December 3, 2008

"कभी आ कर रुला जाते"


"कभी आ कर रुला जाते"

दिल की उजड़ी हुई बस्ती,कभी आ कर बसा जाते
कुछ बेचैन मेरी हस्ती , कभी आ कर बहला जाते...
युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर ,
रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........

20 comments:

  1. कुछ बेचैन मेरी हस्ती , कभी आ कर बहला जाते...
    युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर
    nice

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  2. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........

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  3. दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
    ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
    nice one

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  4. रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
    दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
    ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
    तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
    बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...

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  5. ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
    तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
    बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
    वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........waah kya baat hai!!

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  6. बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
    वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है
    good one seema jee like it
    Regards

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  7. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
    sundar rachna

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  8. रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
    दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
    ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
    sundar

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  9. liked it mam
    Regards
    ashok

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  10. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    Beautiful composition mam
    Regards

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  11. nice one.....as always seema jee
    Regards

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  12. तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
    बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
    वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
    very nicely written mam
    Regards

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  13. युगों का फासला झेला , ऐसे एक उम्मीद को लेकर ,
    रात भर आँखें हैं जगती . कभी आ कर सुला जाते ....
    दुनिया के सितम ऐसे , उस पर मंजिल नही कोई ,
    ख़ुद की बेहाली पे तरसती , कभी आ कर सजा जाते ...
    nice composition
    regards

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  14. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
    Shabdo ka maaya jaal

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  15. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........
    last 2 lines are heart of poem.....just too good

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  16. वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........

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  17. तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
    बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते...
    वीराना, मीलों भर सुखा , मेरी पलकों मे बसता है ,
    बनजर हो के राह तकती , कभी आ कर रुला जाते.........too good

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  18. तेरी यादों की खामोशी , और ये बेजार मेरा दामन,
    बेजुबानी है मुझको डसती , कभी आ कर बुला जाते

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