Monday, December 1, 2008

"सरहदे-इश्क़"


"सरहदे-इश्क़"

है ये शो'ला के या चिंगारी है,
आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है ...
(आतश-अंगेज़ - आग भड़काने, उत्तेजित करने वाली
ज़िल्लत - अपमान, तिरस्कार
काइनात - दुनिया
क़ाइल - अभिभूत
वारी - न्योछावर )


19 comments:

  1. चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
    के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
    दिल पे अपने ये बात भारी है ...
    सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    well said mam
    Regards

    ReplyDelete
  2. well composed
    Regards

    ReplyDelete
  3. दिल पे अपने ये बात भारी है ...
    सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    आप पर जान ही तो वारी है ...

    ReplyDelete
  4. है ये शो'ला के या चिंगारी है,
    आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
    यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
    चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
    well written as always

    ReplyDelete
  5. सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    nice one
    regards

    ReplyDelete
  6. well articulated
    regards

    ReplyDelete
  7. सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    आप पर जान ही तो वारी है ...
    well composed

    ReplyDelete
  8. चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
    के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
    दिल पे अपने ये बात भारी है ...
    सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....

    ReplyDelete
  9. हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    आप पर जान ही तो वारी है

    ReplyDelete
  10. इश्क़ से काइनात हारी है ....
    हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    nice as always
    Regards

    ReplyDelete
  11. इश्क़ से काइनात हारी है ....
    हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    good one mam
    Regards

    ReplyDelete
  12. है ये शो'ला के या चिंगारी है,
    आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
    यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
    चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...

    ReplyDelete
  13. सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
    आप पर जान ही तो वारी है ...

    ReplyDelete
  14. चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
    के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
    दिल पे अपने ये बात भारी है ...
    सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
    इश्क़ से काइनात हारी है ....
    bahot khoob

    ReplyDelete

Thnaks for stopping by and taking time to express your opinion.
Each & every words from you is motivation for us.