हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा, साजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....

हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
ReplyDeleteसाजों मे भी अब तार नही..
lovely lines mam
Regards
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
ReplyDeleteक्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
ReplyDeleteशब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
ReplyDeleteसाजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही
Lovely seema jee, how did u knew my condition?
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
ReplyDeleteमिलने के मगर आसार नही.....
lovely compostion
ReplyDeleteRegards
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
ReplyDeleteरोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
ReplyDeleteमिलने के मगर आसार नही.....
waah!!
nice one mam as always
ReplyDeleteRegards
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
ReplyDeleteक्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
nice one.....
ReplyDeleteजज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
ReplyDeleteभावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
ReplyDeleteक्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
too good mam...I Really like ur poem
Thx & Regards
भावों मे मिलता करार नही...
ReplyDeleteतुम अनजानी अभिलाषा मेरी,