Saturday, December 6, 2008

तुम बिन

हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
साजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....

14 comments:

  1. हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
    साजों मे भी अब तार नही..
    lovely lines mam
    Regards

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  2. तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
    क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...

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  3. बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
    शब्दों मे भी वो सार नही...
    जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
    भावों मे मिलता करार नही...

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  4. हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,
    साजों मे भी अब तार नही..
    बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
    शब्दों मे भी वो सार नही
    Lovely seema jee, how did u knew my condition?

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  5. तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
    मिलने के मगर आसार नही.....

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  6. हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
    रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
    तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
    मिलने के मगर आसार नही.....

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  7. तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
    मिलने के मगर आसार नही.....
    waah!!

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  8. तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
    क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...

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  9. जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
    भावों मे मिलता करार नही...

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  10. तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
    क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
    हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
    रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
    too good mam...I Really like ur poem
    Thx & Regards

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  11. भावों मे मिलता करार नही...
    तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,

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