
"ख्वाबों के आँगन "
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया,
वर्तमान ने हकीक़त ,
का दामन ठुकराया ,
अस्तित्व ने अपने,
सामर्थ्य से मुख फैरा,
शीशमहल का निर्माण किया...
विवशता का परित्याग कर ,
दर्पण मचला जिज्ञासा का,
भ्रम की आगोश मे,
मनमोहक श्रिंगार किया ...
बहते दरिया की भूमि पर ,
इक नीवं बना अरमानो की,
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
निरर्थक एक प्रयास किया ...
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया,
वर्तमान ने हकीक़त ,
का दामन ठुकराया ,
अस्तित्व ने अपने,
सामर्थ्य से मुख फैरा,
शीशमहल का निर्माण किया...
विवशता का परित्याग कर ,
दर्पण मचला जिज्ञासा का,
भ्रम की आगोश मे,
मनमोहक श्रिंगार किया ...
बहते दरिया की भूमि पर ,
इक नीवं बना अरमानो की,
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........

इक नीवं बना अरमानो की,
ReplyDeleteहर तर्ष्णा को पा लेने का,
निरर्थक एक प्रयास किया
ख्वाबों के आँगन ने अपना
ReplyDeleteकुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
ReplyDeleteनिरर्थक एक प्रयास किया ...
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........
Outstanding
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ReplyDeleteख्वाबों के आँगन ने अपना
nice 1
ReplyDeleteTHC & REGARDS
ख्वाबों के आँगन ने अपना
ReplyDeleteकुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया,
वर्तमान ने हकीक़त ,
का दामन ठुकराया ,
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
ReplyDeleteनिरर्थक एक प्रयास किया ...
शीशमहल का निर्माण किया...
ReplyDeleteविवशता का परित्याग कर ,
दर्पण मचला जिज्ञासा का,
भ्रम की आगोश मे,
good as always
ReplyDeleteइक नीवं बना अरमानो की,
ReplyDeleteहर तर्ष्णा को पा लेने का,
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........
शीशमहल का निर्माण किया...
ReplyDeleteविवशता का परित्याग कर ,
दर्पण मचला जिज्ञासा का,
भ्रम की आगोश मे,
good composition mam
THX & REGARDS
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ReplyDeleteख्वाबों के आँगन ने अपना
Lovely
Ashok,Kota
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ReplyDeleteख्वाबों के आँगन ने अपना
इक नीवं बना अरमानो की,
ReplyDeleteहर तर्ष्णा को पा लेने का,
Good lines
Regards
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
ReplyDeleteनिरर्थक एक प्रयास किया ...
good one
ReplyDeleteभ्रम की आगोश मे,
ReplyDeleteमनमोहक श्रिंगार किया ...
बहते दरिया की भूमि पर ,
इक नीवं बना अरमानो की,
bahot khoob!!
ReplyDeleteख्वाबों के आँगन ने अपना
ReplyDeleteकुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........