
" मायाजाल"
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
छलावों की हवाएं बहती रही
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
छलावों की हवाएं बहती रही
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...

जाग्रत हो अंगडाई ली..
ReplyDeleteद्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
lovely
ReplyDeleteह्रदय के मानचित्र पर पल पल
ReplyDeleteतमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
@ avinash there is some prb visiting this blog of urs 4 last2days..wats d reasn avi?
ReplyDeleteह्रदय के मानचित्र पर पल पल
ReplyDeleteतमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
nice lines
छलावों की हवाएं बहती रही
ReplyDeleteबहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
जाग्रत हो अंगडाई ली..
ReplyDeleteद्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
ReplyDeleteतमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
ReplyDeleteजाग्रत हो अंगडाई ली..
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
ReplyDeleteतमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
nice lines
lovely composition mam
ReplyDeleteRegards
Ashok, Kota
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
ReplyDeleteसंकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...
beautiful composition mam
ReplyDeleteRegards
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
ReplyDeleteकायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
ReplyDeleteकायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
छलावों की हवाएं बहती रही
ReplyDeleteबहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
good one
जाग्रत हो अंगडाई ली..
ReplyDeleteद्रढ़निश्चयता का उपहास कर
good composiotion mam as always
ReplyDeleteRegards
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
ReplyDeleteछलावों की हवाएं बहती रही
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
ReplyDeleteकायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
bahot Khoob
जाग्रत हो अंगडाई ली..
ReplyDeleteद्रढ़निश्चयता का उपहास कर
sundar rachna
I like your blog.
ReplyDeleteCarlos
Portugal
I like your blog.
ReplyDeleteCarlos
Portugal