Tuesday, December 16, 2008



"द्रष्टि"
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....

20 comments:

  1. तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि

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  2. अनंतकाल से ये द्रष्टि
    प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
    पलकों के आंचल से
    सर को ढांक ,
    beautiful composition

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  3. प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि
    प्रतीक्षा पग पर ....

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  4. प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि
    प्रतीक्षा पग पर ....

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  5. व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
    प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि

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  6. प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि
    प्रतीक्षा पग पर ....

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  7. तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि

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  8. डूबती , तरती , उभरती ,
    व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु

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  9. डूबती , तरती , उभरती ,
    व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु

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  10. तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि

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  11. मैं तो समझ ही नही पा रहा...कि सीमा जी आप कहाँ-कहाँ हो......अरे-रे-रे-रे-रे-..........मेरा "मतबल" है कि आप कहाँ नहीं हो.....ऐसा करो ना....आप मेरे भी ब्लॉग पर आ जाओ ना प्लीज़.....!!

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  12. Your comment has been saved and will be visible after blog owner approval. लो कर लो बात ............यहाँ भी "ऑनर" की स्वीकृति.....!!!बाप-रे-बाप.....मैं तो नही आता यहाँ....ऐसा लगता है....कि दरवाज़ा खटखटाकर आऊँ.....या गला खंखारकर कि मैं आ रहा हूँ.....सब सावधान.....सीमा जी.....ये क्या है भाई...ब्लॉग हमारा दूसरा घर है.....यहाँ आकर कहने की अनुमति......!!?? अरे आपको नहीं समझ आए तो टिप्पणी हटा दो ना....!!बस....!!

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  13. प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी
    अनंतकाल से ये द्रष्टि
    प्रतीक्षा पग पर ....

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  14. डूबती , तरती , उभरती ,
    व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
    प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
    तुम्हारी इक आभा को प्यासी

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  15. आतुरता की सीमा लाँघ
    अविरल अश्रुधारा मे
    डूबती , तरती , उभरती ,
    व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु

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