
"द्रष्टि"
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....

तुम्हारी इक आभा को प्यासी
ReplyDeleteअनंतकाल से ये द्रष्टि
nice poem
ReplyDeleteअनंतकाल से ये द्रष्टि
ReplyDeleteप्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
beautiful composition
sundar rachna
ReplyDeleteप्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
ReplyDeleteतुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....
good composition
ReplyDeleteप्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
ReplyDeleteतुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
ReplyDeleteप्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
too good as always regards
ReplyDeleteप्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
ReplyDeleteतुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
ReplyDeleteअनंतकाल से ये द्रष्टि
डूबती , तरती , उभरती ,
ReplyDeleteव्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
डूबती , तरती , उभरती ,
ReplyDeleteव्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
ReplyDeleteअनंतकाल से ये द्रष्टि
good poem mam
ReplyDeleteRegards
मैं तो समझ ही नही पा रहा...कि सीमा जी आप कहाँ-कहाँ हो......अरे-रे-रे-रे-रे-..........मेरा "मतबल" है कि आप कहाँ नहीं हो.....ऐसा करो ना....आप मेरे भी ब्लॉग पर आ जाओ ना प्लीज़.....!!
ReplyDeleteYour comment has been saved and will be visible after blog owner approval. लो कर लो बात ............यहाँ भी "ऑनर" की स्वीकृति.....!!!बाप-रे-बाप.....मैं तो नही आता यहाँ....ऐसा लगता है....कि दरवाज़ा खटखटाकर आऊँ.....या गला खंखारकर कि मैं आ रहा हूँ.....सब सावधान.....सीमा जी.....ये क्या है भाई...ब्लॉग हमारा दूसरा घर है.....यहाँ आकर कहने की अनुमति......!!?? अरे आपको नहीं समझ आए तो टिप्पणी हटा दो ना....!!बस....!!
ReplyDeleteप्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
ReplyDeleteतुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....
डूबती , तरती , उभरती ,
ReplyDeleteव्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
आतुरता की सीमा लाँघ
ReplyDeleteअविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु