
"फिर उसी शाख़ पर"
गीत कोई आज, यूँ ही गुनगुनाया जाए,
शब्दों को सुर-ताल से सजाया जाए
बेचैनियों को करके दफ़्न
दिल के किसी कोने में,
रागिनियों से मन को बहलाया जाए
ख़ामोशी के आग़ोश से
दामन को छुड़ा कर,
ख़ामोशी के आग़ोश से
दामन को छुड़ा कर,
ज़रा,स्वर को अधरों से छलकाया जाए
शक्वों के मौसम को
शक्वों के मौसम को
करके रुख़सत दर से
मोहब्बत की चाँदनी में नहाया जाए
उजालों के आँचल में
सज कर सँवर कर
उजालों के आँचल में
सज कर सँवर कर
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
परदए-नाज़ो-अंदाज़
उनको दिखलाकर,
ख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
बर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
(शक्वों = शिकायतों
ख़िरामा = आहिस्ता
बर्क़ = बिजली
नशेमन = घोंसला )
परदए-नाज़ो-अंदाज़
उनको दिखलाकर,
ख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
बर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
(शक्वों = शिकायतों
ख़िरामा = आहिस्ता
बर्क़ = बिजली
नशेमन = घोंसला )

मोहब्बत की चाँदनी में नहाया जाए
ReplyDeleteउजालों के आँचल में
सज कर सँवर कर
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
beautiful composition
ReplyDeleteमोहब्बत की चाँदनी में नहाया जाए
ReplyDeleteउजालों के आँचल में
सज कर सँवर कर
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
परदए-नाज़ो-अंदाज़
beautiful composition
ReplyDeleteआईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
ReplyDeleteपरदए-नाज़ो-अंदाज़
उनको दिखलाकर,
ख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
बर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
beautiful pics
ReplyDeletelovely composition
ReplyDeleteख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
ReplyDeleteबर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
ख़ामोशी के आग़ोश से
ReplyDeleteदामन को छुड़ा कर,
ख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
ReplyDeleteबर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
good as always
ReplyDeleteRegards
well written
ReplyDeleteउजालों के आँचल में
ReplyDeleteसज कर सँवर कर
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
परदए-नाज़ो-अंदाज़
उनको दिखलाकर,
well composed
ReplyDeleteख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
ReplyDeleteबर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
दामन को छुड़ा कर,
ReplyDeleteज़रा,स्वर को अधरों से छलकाया जाए
शक्वों के मौसम को
करके रुख़सत दर से
मोहब्बत की चाँदनी में नहाया जाए
उजालों के आँचल में
lovely composition
ReplyDeleteज़रा भी मोहलत,
ReplyDeleteफिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
ReplyDeleteपरदए-नाज़ो-अंदाज़
nice lines
regards
beautiful composition
ReplyDeletevery good one
ReplyDeleteRegards