
"हाल-ऐ-दिल"
पलकों पे आए और भिगाते चले गए,
आंसू तुम्हारे फूल खिलाते चले गए..
तुमने कहा था हाल-ऐ-दिल हम बयाँ करें
हम पूरी रात तुम को बताते चले गए...
मुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही,
हम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...
तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
तुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए .........

nice composition
ReplyDeleteमुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही,
ReplyDeleteहम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...
तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
ReplyDeleteतुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
nice as always
ReplyDeleteअब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
ReplyDeleteहम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए .........
तुमने कहा था हाल-ऐ-दिल हम बयाँ करें
ReplyDeleteहम पूरी रात तुम को बताते चले गए...
तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
ReplyDeleteतुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
मुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही,
ReplyDeleteहम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...
lovely lines
मुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही,
ReplyDeleteहम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...
तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
ReplyDeleteतुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
beautiful composition
ReplyDeleteRegards
तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
ReplyDeleteतुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए
good as always Regards
अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
ReplyDeleteहम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए .........
well composed
ReplyDeleteतुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
ReplyDeleteतुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....
अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए .........
भावों से भरी रचना।
ReplyDeleteअब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए
बहुत ही खूब। फोटो भी सुन्दर।