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bahut sundar.....
Bahut sundar bhav ..bahut-2 badhai ...
Beautiful feeling enveloping the poem ,well written !!! thnx a lot for sharing ..
अश्रु से भी प्रकट ना होना अधरों से छलका जाएमौन आवरण मे सिमटाये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटाये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटाये प्रेम प्रतिपल सकुचायेsundar rachna
भावों से भी व्यक्त ना हो,ना अक्षर में बांधा जाएखामोशी की व्याकरण बांचीअर्थ नही कोई मिलपाये
भावों से भी व्यक्त ना हो,ना अक्षर में बांधा जाएखामोशी की व्याकरण बांची
haann...bahut sundar...
Dr Nishithanks a tonne 4 passing by my blog..all the best to u and friends..
अर्थ नही कोई मिलपायेअश्रु से भी प्रकट ना होना अधरों से छलका जाए
खामोशी की व्याकरण बांचीअर्थ नही कोई मिलपाये
सफल प्रयास, सून्दर कविता, बहुत अच्छा लगाधन्यवाद
वाह क्या बात है!!हमेशा की तरह एक और बेहतरीन कविता, सुन्दर रचनाधन्यवाद
प्रेम भाव की सुन्दर अभिव्यक्ति. बेहतरीन रचना. बहूत स्फल प्रयास. धन्यवाद
nice composition
very well xpressedregards
प्रेम को बहुत ही सहज भाव सी आपने प्रकट किया है सीमाजी. हमेशा के तरह एक बेतरीन कविता.धन्यवाद
प्रेम को व्यक्त करना सचमुच मे एक मुस्किल भरा कार्य हे. आपने इसे बहुत सरलता से और शब्दो का माया जाल बुन के किया है सीमाजीधन्यवाद
अर्थ नही कोई मिलपायेअश्रु से भी प्रकट ना होना अधरों से छलका जाएमौन आवरण मे सिमटाsundar rachnaRegards
सुंदर कविता. एक बेतरीन और सफल प्रयास सीमाजीधन्यवाद
सुंदर रचना. प्रेम भाव का सफल प्रयास. धनयवाद
मौन आवरण मे सिमटाये प्रेम प्रतिपल सकुचायेसुंदर रचना एक बेहतरीन प्रयास सीमाजी.धन्यवाद
sundar rachna
एक अहसास ये भी होता है। बहुत उम्दा।
Thnaks for stopping by and taking time to express your opinion.Each & every words from you is motivation for us.
bahut sundar.....
ReplyDeleteBahut sundar bhav ..bahut-2 badhai ...
ReplyDeleteBeautiful feeling enveloping the poem ,well written !!! thnx a lot for sharing ..
ReplyDeleteअश्रु से भी प्रकट ना हो
ReplyDeleteना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटा
ReplyDeleteये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटा
ReplyDeleteये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
sundar rachna
भावों से भी व्यक्त ना हो,
ReplyDeleteना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
भावों से भी व्यक्त ना हो,
ReplyDeleteना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
haann...bahut sundar...
ReplyDeleteDr Nishi
ReplyDeletethanks a tonne 4 passing by my blog..all the best to u and friends..
भावों से भी व्यक्त ना हो,
ReplyDeleteना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
ReplyDeleteअश्रु से भी प्रकट ना हो
ना अधरों से छलका जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
ReplyDeleteअर्थ नही कोई मिलपाये
सफल प्रयास, सून्दर कविता, बहुत अच्छा लगा
ReplyDeleteधन्यवाद
वाह क्या बात है!!हमेशा की तरह एक और बेहतरीन कविता, सुन्दर रचना
ReplyDeleteधन्यवाद
प्रेम भाव की सुन्दर अभिव्यक्ति. बेहतरीन रचना. बहूत स्फल प्रयास. धन्यवाद
ReplyDeletenice composition
ReplyDeletevery well xpressed
ReplyDeleteregards
प्रेम को बहुत ही सहज भाव सी आपने प्रकट किया है सीमाजी. हमेशा के तरह एक बेतरीन कविता.
ReplyDeleteधन्यवाद
प्रेम को व्यक्त करना सचमुच मे एक मुस्किल भरा कार्य हे. आपने इसे बहुत सरलता से और शब्दो का माया जाल बुन के किया है सीमाजी
ReplyDeleteधन्यवाद
अर्थ नही कोई मिलपाये
ReplyDeleteअश्रु से भी प्रकट ना हो
ना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
sundar rachna
Regards
सुंदर कविता. एक बेतरीन और सफल प्रयास सीमाजी
ReplyDeleteधन्यवाद
भावों से भी व्यक्त ना हो,
ReplyDeleteना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
सुंदर रचना. प्रेम भाव का सफल प्रयास. धनयवाद
ReplyDeleteअश्रु से भी प्रकट ना हो
ReplyDeleteना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटा
ReplyDeleteये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
सुंदर रचना एक बेहतरीन प्रयास सीमाजी.
धन्यवाद
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ReplyDeleteना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
sundar rachna
ReplyDeleteमौन आवरण मे सिमटा
ReplyDeleteये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ReplyDeleteना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
मौन आवरण मे सिमटा
ReplyDeleteये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ReplyDeleteना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
एक अहसास ये भी होता है।
ReplyDeleteबहुत उम्दा।