Thursday, January 15, 2009

"प्रेम"

भावों से भी व्यक्त ना हो,
ना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

33 comments:

  1. Bahut sundar bhav ..bahut-2 badhai ...

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  2. Beautiful feeling enveloping the poem ,well written !!! thnx a lot for sharing ..

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  3. अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  4. मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  5. मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
    sundar rachna

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  6. भावों से भी व्यक्त ना हो,
    ना अक्षर में बांधा जाए
    खामोशी की व्याकरण बांची
    अर्थ नही कोई मिलपाये

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  7. भावों से भी व्यक्त ना हो,
    ना अक्षर में बांधा जाए
    खामोशी की व्याकरण बांची

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  8. Dr Nishi
    thanks a tonne 4 passing by my blog..all the best to u and friends..

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  9. भावों से भी व्यक्त ना हो,
    ना अक्षर में बांधा जाए
    खामोशी की व्याकरण बांची

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  10. अर्थ नही कोई मिलपाये
    अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए

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  11. खामोशी की व्याकरण बांची
    अर्थ नही कोई मिलपाये

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  12. सफल प्रयास, सून्दर कविता, बहुत अच्छा लगा
    धन्यवाद

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  13. वाह क्या बात है!!हमेशा की तरह एक और बेहतरीन कविता, सुन्‍दर रचना
    धन्यवाद

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  14. प्रेम भाव की सुन्दर अभिव्यक्ति. बेहतरीन रचना. बहूत स्फल प्रयास. धन्यवाद

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  15. प्रेम को बहुत ही सहज भाव सी आपने प्रकट किया है सीमाजी. हमेशा के तरह एक बेतरीन कविता.
    धन्यवाद

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  16. प्रेम को व्यक्त करना सचमुच मे एक मुस्किल भरा कार्य हे. आपने इसे बहुत सरलता से और शब्दो का माया जाल बुन के किया है सीमाजी
    धन्यवाद

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  17. अर्थ नही कोई मिलपाये
    अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    sundar rachna
    Regards

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  18. सुंदर कविता. एक बेतरीन और सफल प्रयास सीमाजी

    धन्यवाद

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  19. भावों से भी व्यक्त ना हो,
    ना अक्षर में बांधा जाए
    खामोशी की व्याकरण बांची
    अर्थ नही कोई मिलपाये

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  20. सुंदर रचना. प्रेम भाव का सफल प्रयास. धनयवाद

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  21. अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  22. मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये
    सुंदर रचना एक बेहतरीन प्रयास सीमाजी.
    धन्यवाद

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  23. अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  24. मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  25. अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  26. मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  27. अश्रु से भी प्रकट ना हो
    ना अधरों से छलका जाए
    मौन आवरण मे सिमटा
    ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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  28. एक अहसास ये भी होता है।
    बहुत उम्दा।

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