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sundar rachna seemajee
बहुत खूब, अगर प्रिय तक न भी पहुंचे आपके शब्द, पाठक वृन्द भी आह्लादित होगा इनको पढ़के।
सोच की गागर सेनिकल शब्द बनअधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.
सुन्दर शब्दों से सजी एक सुन्दर रचना। हर साँस मे जर्रा जर्रापलता है कुछ,यूँ लगे साथ मेरेचलता है कुछ.बहुत उम्दा।
मचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...तुम्हारा है प्रिये ???
हर साँस मे जर्रा जर्रापलता है कुछ,यूँ लगे साथ मेरेचलता है कुछ.सोच की गागर से
Kya baat hai...
जो मोम बनके मुझमे ,बर्फ़ मानिंद .....पिघलता है कुछ
निकल शब्द बनअधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...तुम्हारा है प्रिये ???
अधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...तुम्हारा है प्रिये ???
निकल शब्द बनअधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...
waah1 Kya baat hai
सोच की गागर सेनिकल शब्द बनअधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...
अधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...
सीमा की सलाम!
अधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या ...तुम्हारा है प्रिये ???जो मोम बनके मुझमे ,बर्फ़ मानिंद .....पिघलता है कुछ बहुत ही मार्मिक, प्यार की गहराई का मधुर अहसास हैै। बहुत खूब।
good one ma'am
तुम्हारा है प्रिये ???जो मोम बनके मुझमे ,बर्फ़ मानिंद .....पिघलता है कुछ wah kya baat hai
सुन्दर रचना सीमा जी. बधाई!!
sundar
ultimate ....बहुत ही खूबसूरत रचना .....
निकल शब्द बनअधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या
अधरों पे खामोशी सेमचलता है कुछ.ये एहसास क्या
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sundar rachna seemajee
ReplyDeleteबहुत खूब, अगर प्रिय तक न भी पहुंचे आपके शब्द, पाठक वृन्द भी आह्लादित होगा इनको पढ़के।
ReplyDeleteसोच की गागर से
ReplyDeleteनिकल शब्द बन
अधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
सुन्दर शब्दों से सजी एक सुन्दर रचना।
ReplyDeleteहर साँस मे जर्रा जर्रा
पलता है कुछ,
यूँ लगे साथ मेरे
चलता है कुछ.
बहुत उम्दा।
मचलता है कुछ.
ReplyDeleteये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
हर साँस मे जर्रा जर्रा
ReplyDeleteपलता है कुछ,
यूँ लगे साथ मेरे
चलता है कुछ.
सोच की गागर से
मचलता है कुछ.
ReplyDeleteये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
Kya baat hai...
ReplyDeleteजो मोम बनके मुझमे ,
ReplyDeleteबर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
जो मोम बनके मुझमे ,
ReplyDeleteबर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
निकल शब्द बन
ReplyDeleteअधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
निकल शब्द बन
ReplyDeleteअधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
अधरों पे खामोशी से
ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
निकल शब्द बन
ReplyDeleteअधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
जो मोम बनके मुझमे ,
ReplyDeleteबर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
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ReplyDeleteसोच की गागर से
ReplyDeleteनिकल शब्द बन
अधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
अधरों पे खामोशी से
ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
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ReplyDeleteअधरों पे खामोशी से
ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
जो मोम बनके मुझमे ,
बर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
बहुत ही मार्मिक, प्यार की गहराई का मधुर अहसास हैै।
बहुत खूब।
अधरों पे खामोशी से
ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
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ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
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ये एहसास क्या ...
जो मोम बनके मुझमे ,
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पिघलता है कुछ
good one ma'am
ReplyDeleteजो मोम बनके मुझमे ,
ReplyDeleteबर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
तुम्हारा है प्रिये ???
ReplyDeleteजो मोम बनके मुझमे ,
बर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
wah kya baat hai
अधरों पे खामोशी से
ReplyDeleteमचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
सुन्दर रचना सीमा जी. बधाई!!
ReplyDeleteजो मोम बनके मुझमे ,
ReplyDeleteबर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ
sundar
ReplyDeleteultimate ....बहुत ही खूबसूरत रचना .....
ReplyDeleteनिकल शब्द बन
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मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
निकल शब्द बन
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मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या
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ये एहसास क्या