झील को दर्पण बना
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी...
मस्त पवन की अंगडाई
दरख्तों के झुरमुट में छिप कर
परिधान बदल बदल
परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....
नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....
खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......
दूर बजती किसी बंसी की धुन
पायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी.....
खामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......
sundar rachna seema jee
ReplyDeleteबेहतरीन रचना सीमा जी, सुंदर
ReplyDeleteधन्यवाद
वाह क्या बात है, सुंदर रचना
ReplyDeleteशुक्रिया
सुंदर रचना सीमाजी
ReplyDeleteधन्यवाद
वाह! बहुत सुंदर कविता
ReplyDeletekhoobsorat rachna
ReplyDeleteनदिया पुरे वेग मे बह
ReplyDeleteकिनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....
रात के स्वर्णिम पहर में
ReplyDeleteझील को दर्पण बना
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी
खामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......
सुंदर रचना सीमा जी, आपकी कविताओ मे बहुत भावनाए होती है.
ReplyDeleteध्नयवाद
खामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......
good clicks n info
ReplyDeleteखामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......
sundar rachna seema jee
ReplyDeletebaatein bhul jaati hai
ReplyDeleteyaadein yaad aati hai...
:)
सुन्दर रचना सीमाजी, एक बेतरीन कविता
ReplyDeleteशुक्रिया
नदिया पुरे वेग मे बह
ReplyDeleteकिनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....
खामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी
sundar seemajee
मस्त पवन की अंगडाई
ReplyDeleteदरख्तों के झुरमुट में छिप कर
परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....
bahut khub
ReplyDeleteदूर बजती किसी बंसी की धुन
ReplyDeleteपायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी
Seema ji ,
ReplyDeletebahut sundar geet. man kee bhavnaon men shabdon ke pankh lagane kee kala apke geeton ko khoobsooratee pradan kartee hai.
Hemant Kumar
खामोशी की आगोश मे
ReplyDeleteरात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......