Monday, March 2, 2009

"तुम चाहो तो"


एक अधूरे गीत का
मुखडा मात्र हूँ,
तुम चाहो तो
छेड़ दो कोई तार सुर का
एक मधुर संगीत में
मै ढल जाऊंगा ......

खामोश लब पे
खुश्क मरुस्थल सा जमा हूँ
तुम चाहो तो
एक नाजुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊंगा......

भटक रहा बेजान
रूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
राख बनके अस्थियों की
तिल तिल मिट रहा हूँ
तुम चाहो तो
थाम ऊँगली बस
एक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊंगा .....

24 comments:

  1. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का

    ReplyDelete
  2. बेहतरीन रचना सीमा जी

    ReplyDelete
  3. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  4. बहुत ही बेतरीन रचना सीमा जी की कलम से और सुखद आश्चर्य कि पहले ही यहाँ !

    ReplyDelete
  5. तुम चाहो तो
    एक नाजुक स्पर्श का
    बस दान दे दो
    एक तरल धार बन
    मै फिसल जाऊंगा......

    ReplyDelete
  6. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  7. I suggest : If a short description in english about the poetry is written below the post.

    ReplyDelete
  8. सीमा जी तो कविताओं का एक पूरा इतिहास है हर बार नयी भावनाएं नए बिम्ब और वही पहली बार लिखने वाली ऊर्जा .

    ReplyDelete
  9. सुंदर रचना सीमा जी
    धन्यवाद

    ReplyDelete
  10. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  11. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  12. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  13. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  14. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  15. हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  16. लाजवाब. दिल को छूकर गुजर गयी यह रचना

    ReplyDelete
  17. थाम ऊँगली बस
    एक दुलार दे दो
    बन के शिशु
    मातृत्व की ममता में
    मै पल जाऊंगा

    ReplyDelete
  18. भटक रहा बेजान
    रूह की मनोकामना सा
    तुम चाहो तो
    हर्फ बन जाओ दुआ का
    ईश्वर के आशीर्वाद सा
    मै फल जाउंगा.....

    ReplyDelete
  19. बहुत सुन्दर कविता, सीमा जी!

    ReplyDelete
  20. An interesting and eclectic group of photos; I thought that the hut looked like a good place to rest and reflect upon life! The President's garden also seems like a good place to relax.

    ReplyDelete

Thnaks for stopping by and taking time to express your opinion.
Each & every words from you is motivation for us.