
एक अधूरे गीत का
मुखडा मात्र हूँ,
तुम चाहो तो
छेड़ दो कोई तार सुर का
एक मधुर संगीत में
मै ढल जाऊंगा ......
खामोश लब पे
खुश्क मरुस्थल सा जमा हूँ
तुम चाहो तो
एक नाजुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊंगा......
मुखडा मात्र हूँ,
तुम चाहो तो
छेड़ दो कोई तार सुर का
एक मधुर संगीत में
मै ढल जाऊंगा ......
खामोश लब पे
खुश्क मरुस्थल सा जमा हूँ
तुम चाहो तो
एक नाजुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊंगा......
भटक रहा बेजान
रूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
राख बनके अस्थियों की
तिल तिल मिट रहा हूँ
तुम चाहो तो
थाम ऊँगली बस
एक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊंगा .....
राख बनके अस्थियों की
तिल तिल मिट रहा हूँ
तुम चाहो तो
थाम ऊँगली बस
एक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊंगा .....
भटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
बेहतरीन रचना सीमा जी
ReplyDeleteभटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
बहुत ही बेतरीन रचना सीमा जी की कलम से और सुखद आश्चर्य कि पहले ही यहाँ !
ReplyDeleteतुम चाहो तो
ReplyDeleteएक नाजुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊंगा......
भटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
I suggest : If a short description in english about the poetry is written below the post.
ReplyDeleteसीमा जी तो कविताओं का एक पूरा इतिहास है हर बार नयी भावनाएं नए बिम्ब और वही पहली बार लिखने वाली ऊर्जा .
ReplyDeleteसुंदर रचना सीमा जी
ReplyDeleteधन्यवाद
sundar seema jee
ReplyDeleteभटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
भटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
sundar seemajee
ReplyDeleteभटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
well composed
ReplyDeleteभटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
भटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
हर्फ बन जाओ दुआ का
ReplyDeleteईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
लाजवाब. दिल को छूकर गुजर गयी यह रचना
ReplyDeleteथाम ऊँगली बस
ReplyDeleteएक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊंगा
sundar rachna seema jee
ReplyDeleteभटक रहा बेजान
ReplyDeleteरूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
बहुत सुन्दर कविता, सीमा जी!
ReplyDeleteAn interesting and eclectic group of photos; I thought that the hut looked like a good place to rest and reflect upon life! The President's garden also seems like a good place to relax.
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