Monday, January 5, 2009

"वेदना का वृक्ष"


"वेदना का वृक्ष"

विद्रोह कर आंसुओ ने,
नैनो मे ढलने से इंकार किया
ओर सिसकियाँ भी
कंठ को अवरुद्ध करके सो गयी
स्वर का भी मार्गदर्शन
शब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......

12 comments:

  1. kya baat hai...
    claps !!!

    ReplyDelete
  2. स्वर का भी मार्गदर्शन
    शब्दों ने किया नही
    भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
    लुप्त कहीं हो गयी

    ReplyDelete
  3. अनुभूतियों का स्पंदन भी
    तपस्या में विलीन हुआ
    वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
    स्पर्श दिल ने जब किया .......
    well composed

    ReplyDelete
  4. अनुभूतियों का स्पंदन भी
    तपस्या में विलीन हुआ
    वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
    स्पर्श दिल ने जब किया .......

    ReplyDelete
  5. लुप्त कहीं हो गयी
    अनुभूतियों का स्पंदन भी
    तपस्या में विलीन हुआ
    वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
    स्पर्श दिल ने जब किया .......

    ReplyDelete
  6. शब्दों ने किया नही
    भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
    लुप्त कहीं हो गयी
    अनुभूतियों का स्पंदन भी
    तपस्या में विलीन हुआ

    ReplyDelete
  7. अनुभूतियों का स्पंदन भी
    तपस्या में विलीन हुआ
    वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
    स्पर्श दिल ने जब किया .......

    ReplyDelete
  8. स्वर का भी मार्गदर्शन
    शब्दों ने किया नही
    भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
    लुप्त कहीं हो गयी

    ReplyDelete
  9. beautiful lines... ur a gem.. seema jee

    ReplyDelete
  10. beautiful lines... ur a gem.. seema jee

    ReplyDelete

Thnaks for stopping by and taking time to express your opinion.
Each & every words from you is motivation for us.