
"वेदना का वृक्ष"
विद्रोह कर आंसुओ ने,
नैनो मे ढलने से इंकार किया
ओर सिसकियाँ भी
कंठ को अवरुद्ध करके सो गयी
स्वर का भी मार्गदर्शन
शब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......
kya baat hai...
ReplyDeleteclaps !!!
स्वर का भी मार्गदर्शन
ReplyDeleteशब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
ReplyDeleteतपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......
well composed
अनुभूतियों का स्पंदन भी
ReplyDeleteतपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......
लुप्त कहीं हो गयी
ReplyDeleteअनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......
शब्दों ने किया नही
ReplyDeleteभाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
well composed
ReplyDeleteanother good 1
ReplyDeleteअनुभूतियों का स्पंदन भी
ReplyDeleteतपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......
स्वर का भी मार्गदर्शन
ReplyDeleteशब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
beautiful lines... ur a gem.. seema jee
ReplyDeletebeautiful lines... ur a gem.. seema jee
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