Expect nothing, live frugally on surprise.

Sunday, November 23, 2008

हम को इस घर में जानता है कोई

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई


आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई


पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई


फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई


देर से गूँजतें हैं सन्नाटे
जैसे हम को पुकारता है कोई

14 comments:

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:12 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

Wah kya baat hai
Sneha
Kanpur

Er. Puja Kapoor November 23, 2008 at 8:14 AM  

kya baat hai avi? Ishq ne Gaalib kavi bana diya warna Engineer hum bhi the kaam ke :-)

Er. Puja Kapoor November 23, 2008 at 8:14 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
too good dear

Er. Nidhi Mishra November 23, 2008 at 8:16 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

nice n touching lines

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:16 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

really touching lines

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:17 AM  

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

Nice one sir
Ashok Kota

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:18 AM  

beautiful lines
regards
Ravi Ranjan
Patna

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:19 AM  

दिन कुछ ऐसे गुजारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
wah!
Parul Lucknow

Dr.Nishi Chauhan November 23, 2008 at 8:20 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई
too good avi

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:21 AM  

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई

beautiful r theses line like ur pure heart,god bless ya

Dr. Pragya bajaj November 23, 2008 at 8:24 AM  

पक गया है शजर पे फल शायद
फिर से पत्थर उछालता है कोई

nice one avi

Anonymous,  November 23, 2008 at 8:24 AM  

आईना देख के तसल्ली हुई
हम को इस घर में जानता है कोई

loneliness pesonified
Regards
Rajni Roy
Patna

Dr. Pragya bajaj November 23, 2008 at 8:28 AM  

bue done b so lonely dear.Tek care

seema gupta November 24, 2008 at 8:52 AM  

फिर नजर में लहू के छींटे हैं
तुम को शायद मुघालता है कोई
" beautiful creation, these lines are heart of the poem. keep it up.."

regards

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