Expect nothing, live frugally on surprise.
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Friday, March 20, 2009

"वादों के पुष्प"


"वादों के पुष्प"

बिखेरता रहा वादों के पुष्प वो
मै आँचल यकीन का बिछाये
उन्हें समेटती रही....

अपने स्पर्श की नमी से वो
उन पुष्पों को जिलाता रहा
मै मासूम शिशु की तरह
उन्हें सहेजती रही......

हवाओं को रंगता रहा वो
इन्द्रधनुषी ख्वाबो की तुलिका से
मै बंद पलकों मे
उन्हें बिखेरती रही ....

आज सभी वादों का वजूद
अपना आस्तित्व खोने लगा .......
मै अवाक टूटते मिटते हुए
उन्हें देखती रही........

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Monday, March 2, 2009

"तुम चाहो तो"


एक अधूरे गीत का
मुखडा मात्र हूँ,
तुम चाहो तो
छेड़ दो कोई तार सुर का
एक मधुर संगीत में
मै ढल जाऊंगा ......

खामोश लब पे
खुश्क मरुस्थल सा जमा हूँ
तुम चाहो तो
एक नाजुक स्पर्श का
बस दान दे दो
एक तरल धार बन
मै फिसल जाऊंगा......

भटक रहा बेजान
रूह की मनोकामना सा
तुम चाहो तो
हर्फ बन जाओ दुआ का
ईश्वर के आशीर्वाद सा
मै फल जाउंगा.....
राख बनके अस्थियों की
तिल तिल मिट रहा हूँ
तुम चाहो तो
थाम ऊँगली बस
एक दुलार दे दो
बन के शिशु
मातृत्व की ममता में
मै पल जाऊंगा .....

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Monday, February 23, 2009

"झील को दर्पण बना"

रात के स्वर्णिम पहर में

झील को दर्पण बना
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी...

मस्त पवन की अंगडाई
दरख्तों के झुरमुट में छिप कर
परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....

नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

दूर बजती किसी बंसी की धुन
पायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी.....

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Monday, February 9, 2009

"मै डरती हूँ "

मै जानती हूँ .........
मेरे खत का उसे इंतजार नही
मेरे दुख से उसे सरोकार नही ,

मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते
मेरी कोई बात भी उसे याद नही.
मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा
मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

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Wednesday, February 4, 2009

"एहसास"

हर साँस मे जर्रा जर्रा
पलता है कुछ,
यूँ लगे साथ मेरे
चलता है कुछ.
सोच की गागर से
निकल शब्द बन
अधरों पे खामोशी से
मचलता है कुछ.
ये एहसास क्या ...
तुम्हारा है प्रिये ???
जो मोम बनके मुझमे ,
बर्फ़ मानिंद .....
पिघलता है कुछ

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Wednesday, January 28, 2009

"फर्ज निभाने को"


तन्हाइयों ने फ़िर
बीज तेरी यादो के रोपे
मन के बंजर खलिहानों मे
घावो की पनीरी अंकुरित हुई
बीते लम्हों की फसल उगाने को
तिल तिल जल के राख़ हुए
अरमान उर्वरक बन बिखर गये
दिल दरिया अश्रु बह निकले
सींच उन्हें अपना "फर्ज निभाने को

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Wednesday, January 21, 2009

"बस यूँही ......"

है बडा दिलनशी प्यार का सिलसिला ,

मेरे दिल को है तेरे दिल से मिला .
तुम मुझे बस यूँही प्यार करते रहो ,
बस यूँही , बस यूँही ,बस यूँही ......

दिन गुज़र जाने पर रात होती है यूँ ,
दिल से तेरे मेरी बात होती है यूँ ,
मुझसे तुम बस यूँही बात करते रहो

बस यूँही , बस यूँही ,बस यूँही ......

दिल में मेरे जला कर मोहब्बत के दीप ,
तुम ने उम्मीद को कर दिया है समीप ,
इनको बुझने ना देना जलाते रहो ,

बस यूँही , बस यूँही ,बस यूँही ......

मेरी दुनिया को था बस तेरा इंतज़ार ,
इसको महका दिया तुने जाने बहार ,
इस चमन में खड़े मुस्कुराते रहो ,

बस यूँही , बस यूँही ,बस यूँही

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Thursday, January 15, 2009

"प्रेम"

भावों से भी व्यक्त ना हो,
ना अक्षर में बांधा जाए
खामोशी की व्याकरण बांची
अर्थ नही कोई मिलपाये
अश्रु से भी प्रकट ना हो
ना अधरों से छलका जाए
मौन आवरण मे सिमटा
ये प्रेम प्रतिपल सकुचाये

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Wednesday, January 7, 2009

"कभी किसी रोज"

"कभी किसी रोज"
सुनना चाहता हूँ तुम्हे
बैठ खुले आसमान के नीचे सारी रात
चुनना चाहता हूँ रात भर
तुम्हारे होठों से झरते मोतियों को
अपनी पलकों से एक एक कर
भरना चाहता हूँ अपनी हथेलियों में
चाँदनी से धुले तुम्हारे चेहरे की स्निग्धता
महसूस करना चाहता हू
तुम्हारे बालों से ढके अपने चेहरे पर
तुम्हारे साँसों की उष्णता सारी रात
वह रात जो समय की
सीमाओं से परे होगी
और फिर किसी सूरज के
निकलने का भय न होगा.

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Monday, January 5, 2009

"वेदना का वृक्ष"


"वेदना का वृक्ष"

विद्रोह कर आंसुओ ने,
नैनो मे ढलने से इंकार किया
ओर सिसकियाँ भी
कंठ को अवरुद्ध करके सो गयी
स्वर का भी मार्गदर्शन
शब्दों ने किया नही
भाव भंगिमाएं भी रूठ कर
लुप्त कहीं हो गयी
अनुभूतियों का स्पंदन भी
तपस्या में विलीन हुआ
वेदना के वृक्ष की ऊँचाइयों को
स्पर्श दिल ने जब किया .......

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Friday, January 2, 2009

"कैसे तुम्हे भुलाऊ "


"कैसे तुम्हे भुलाऊ "

गर ऐसे याद करोगी मुझको,
कैसे मै जी पाउँगा ? ??

ये शब्द तुम्हारे ....
बाँध तोड़ संयम के सारे ,
बीते लम्हों के कालीन बिछाएं ,

मौन स्वरों के गलियारे मे ,
यादो के घाव पग धरते जायें,

सान्निध्य का एहसास तुम्हारा
विचलित कर मन को भरमाये ,

संकल्प तुम्हारे नर्त्य करे और ,
बोल गूंज कर प्रणय गीत सुनाये
"कैसे तुम्हे भुलाऊ






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Wednesday, December 31, 2008

" नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं"



" नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं"

बीत गया जो साल, भुल जाएँ ,
इस नए साल को गले लगायें ,
करते है दुआ हम रब से सर झुकाके ...
इस साल के सारे सपने पुरे हो आपके.
"नव वर्ष २००९ - आप सभी ब्लॉग परिवार और समस्त देश वासियों के परिवारजनों, मित्रों, स्नेहीजनों व शुभ चिंतकों के लिये सुख, समृद्धि, शांति व धन-वैभव दायक हो॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ इसी कामना के साथ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं "

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Saturday, December 27, 2008

"हाल-ऐ-दिल"


"हाल-ऐ-दिल"

पलकों पे आए और भिगाते चले गए,
आंसू तुम्हारे फूल खिलाते चले गए..

तुमने कहा था हाल-ऐ-दिल हम बयाँ करें
हम पूरी रात तुम को बताते चले गए...

मुद्द्त के बाद बोझील पलकें हो जो रही,
हम लोरियों से तुम को सुलाते चले गए...

तुम्ही को सोचते हुए रहने लगे हैं हम,
तुम्ही के अक्स दिल में बसाते चले गए....

अब यूँ सता रहा है हमें एक ख़याल ही,
हम तुम पे अपना बोझ बढाते चले गए .........

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Monday, December 22, 2008

"फिर उसी शाख़ पर"


"फिर उसी शाख़ पर"

गीत कोई आज, यूँ ही गुनगुनाया जाए,
शब्दों को सुर-ताल से सजाया जाए
बेचैनियों को करके दफ़्न
दिल के किसी कोने में,
रागिनियों से मन को बहलाया जाए
ख़ामोशी के आग़ोश से
दामन को छुड़ा कर,
ज़रा,स्वर को अधरों से छलकाया जाए
शक्वों के मौसम को
करके रुख़सत दर से
मोहब्बत की चाँदनी में नहाया जाए
उजालों के आँचल में
सज कर सँवर कर
आईने में ख़ुद से ही शरमाया जाए
परदए-नाज़ो-अंदाज़
उनको दिखलाकर,
ख़िरामा ख़िरामा चल कर आया जाए
बर्क़ को न देकर के
ज़रा भी मोहलत,
फिर उसी शाख़ पर नशेमन बनाया जाए
(शक्वों = शिकायतों
ख़िरामा = आहिस्ता
बर्क़ = बिजली
नशेमन = घोंसला )

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Thursday, December 18, 2008

"नवभारत टाईम्स का आभार "



"नवभारत टाईम्स का आभार "

" मेरी रचना "ख्वाबों के आँगन " को नवभारत टाईम्स ने १७/१२/२००८ अपनी साइट http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/3846072.cms#write पर जगह देकर मुझे जो मान सम्मान दिया है, उसके लिए मैं सम्पादक जी की दिल से आभारी हूं." अपने अभी पाठको का तहे दिल से शुक्रिया जिन्होंने इस रचना को पढ़कर मुझे एक बार फ़िर से प्रोत्साहन और आशीर्वाद दिया है"

'आभार'

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Tuesday, December 16, 2008



"द्रष्टि"
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर अडिग ,
पलकों के आंचल से
सर को ढांक ,
आतुरता की सीमा लाँघ
अविरल अश्रुधारा मे
डूबती , तरती , उभरती ,
व्याकुलता की ऊँचाइयों को छु
प्रतीक्षाक्षण से तकरार करती
तुम्हारी इक आभा को प्यासी
अनंतकाल से ये द्रष्टि
प्रतीक्षा पग पर ....

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Friday, December 12, 2008

"मौन का उपवास"


"मौन का उपवास"
अनुभूतियों का आचरण
शालीन सभ्य सह्रदय हुआ,
और भावः भी चुप चाप हैं,
अधरों पे आके थम गया
शब्दों का बढ़ता कारवां,
स्वर कंठ में लुप्त हुए,
क्या "मौन" का उपवास है

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Wednesday, December 10, 2008

" मायाजाल"


" मायाजाल"
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे,
यथार्थ को दरकिनार कर
कुछ स्वप्नों ने सांसे भरी...
छलावों की हवाएं बहती रही
बहकावे अपनी चाल चलते रहे,
कायदों को सुला , उल्लंघन ने
जाग्रत हो अंगडाई ली..
द्रढ़निश्चयता का उपहास कर
संकल्प मायाजाल में उलझते रहे,
ह्रदय के मानचित्र पर पल पल
तमन्नाओं के प्रतिबिम्ब उभरते रहे...

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Monday, December 8, 2008

"ख्वाबों के आँगन "


"ख्वाबों के आँगन "
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया,
वर्तमान ने हकीक़त ,
का दामन ठुकराया ,
अस्तित्व ने अपने,
सामर्थ्य से मुख फैरा,
शीशमहल का निर्माण किया...
विवशता का परित्याग कर ,
दर्पण मचला जिज्ञासा का,
भ्रम की आगोश मे,
मनमोहक श्रिंगार किया ...
बहते दरिया की भूमि पर ,
इक नीवं बना अरमानो की,
हर तर्ष्णा को पा लेने का,
निरर्थक एक प्रयास किया ...
ख्वाबों के आँगन ने अपना
कुछ ऐसे फ़िर विस्तार किया.........


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Saturday, December 6, 2008

तुम बिन

हर गीत अधुरा तुम बिन मेरा,

साजों मे भी अब तार नही..
बिखरी हुई रचनाएँ हैं सारी,
शब्दों मे भी वो सार नही...
जज्बातों का उल्लेख करूं क्या ,
भावों मे मिलता करार नही...
तुम अनजानी अभिलाषा मेरी,
क्यूँ सुनते मेरी पुकार नही ...
हर राह पे जैसे पदचाप तुम्हारी ,
रोकूँ कैसे अधिकार नही ...
तर्ष्णा प्यासी एक नज़र को तेरी,
मिलने के मगर आसार नही.....

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