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Thursday, November 20, 2008

" मैं दूंढ लाता हूँ"

अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....
जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"
किसी बस्ती की गलियों में किसी सहरा के आँगन में ...
तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ
तुम्हारे प्यार की परछाइयों में रुक के जो ठहरे ............
सफर मैं जिंदिगी का ऐसे ख्वाबों से सजाता हूँ
तुम्हारी आरजू ने दर बदर भटका दिया मुझको ............
तुम्हारी जुस्तुजू से अपनी दुनिया को बसाता हूँ
कभी दरया के साहिल पे कभी मोजों की मंजिल पे........
तुम्हें मैं ढूँडने हर हर जगह अपने को पाता हूँ
हवा के दोष पर हो कि पानी की रवानी पे .............
तुम्हारी याद में मैं अपनी हस्ती को भुलाता हूँ
मुझे अब यूँ ने तड़पाओ चली आओ चली आओ ......
चली आओ चली आओ चली आओ चली आओ
अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....
जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"..........

31 comments:

Anonymous,  November 20, 2008 at 11:08 AM  

अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....
जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"
किसी बस्ती की गलियों में किसी सहरा के आँगन में ...
तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ
kya baat hai seema jee

Anonymous,  November 20, 2008 at 11:09 AM  

किसी बस्ती की गलियों में किसी सहरा के आँगन में ...
तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ
waah bahot khoob
Regards
Ashok,Kota

seema gupta November 20, 2008 at 11:14 AM  

" hi Avinash. nice change and attractive template.... one more request, pls setting mey jaker select "formatting" than in time zone select "(GMT+05:30) INDIA sATNDARD TIME) because time and date is always wrong on the blog and it creates some problem in posting han. hope you will take it positively.."

regards

Er. Snigddha Aggarwal November 20, 2008 at 1:17 PM  

तुम्हारी याद में मैं अपनी हस्ती को भुलाता हूँ
मुझे अब यूँ ने तड़पाओ चली आओ चली आओ ......
चली आओ चली आओ चली आओ चली आओ
अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....
जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"..........
kya baat hai bahot khub...like it a lot
Ragards

Er. Snigddha Aggarwal November 20, 2008 at 1:17 PM  

@ Avinash this template is better,so u finally learned HTML?

Anonymous,  November 20, 2008 at 1:18 PM  

bahot khoob
Ravi Ranjan
Patna

Dr. Aradhna Awasthi November 20, 2008 at 1:20 PM  

तुम्हें मैं ढूँडने हर हर जगह अपने को पाता हूँ
हवा के दोष पर हो कि पानी की रवानी पे .............
तुम्हारी याद में मैं अपनी हस्ती को भुलाता हूँ
मुझे अब यूँ ने तड़पाओ चली आओ चली आओ ......
wah wah!!

Anonymous,  November 20, 2008 at 1:20 PM  

sundar rachna

Dr. Pragya bajaj November 20, 2008 at 1:23 PM  

avinash dis template is better

Dr. Neha Srivastav November 20, 2008 at 1:45 PM  

तुम्हारी जुस्तुजू से अपनी दुनिया को बसाता हूँ
कभी दरया के साहिल पे कभी मोजों की मंजिल पे........
तुम्हें मैं ढूँडने हर हर जगह अपने को पाता हूँ
हवा के दोष पर हो कि पानी की रवानी पे .............
तुम्हारी याद में मैं अपनी हस्ती को भुलाता हूँ
bahot sundar hai aapki rachna
Regards

Anonymous,  November 20, 2008 at 1:45 PM  

Khoobosurat,dil ko choo liya
Dhanyavaad

Er. Puja Kapoor November 20, 2008 at 2:00 PM  

तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ
तुम्हारे प्यार की परछाइयों में रुक के जो ठहरे ............
सफर मैं जिंदिगी का ऐसे ख्वाबों से सजाता हूँ
तुम्हारी आरजू ने दर बदर भटका दिया मुझको ............
Like it,to good
regards

Anonymous,  November 20, 2008 at 2:01 PM  

u always write nice poems.I like all of them
Regards

Er. Avinash Pandey November 20, 2008 at 2:15 PM  

तुम्हारी खुशबुएँ फैली जहाँ भी हों मैं जाता हूँ
तुम्हारे प्यार की परछाइयों में रुक के जो ठहरे ............
सफर मैं जिंदिगी का ऐसे ख्वाबों से सजाता हूँ
तुम्हारी आरजू ने दर बदर भटका दिया मुझको ............
तुम्हारी जुस्तुजू से अपनी दुनिया को बसाता हूँ
impressed,nice one mam
Regards

Er. Avinash Pandey November 20, 2008 at 2:17 PM  

yes seema jee I have updated date and time according to IST. Thx 4 suggestion,.
This is a new template and is not a default Google blogspot Template so if any one is having any problem with its feature pleae let me know.Would be greatful.
Thankz & Regards

Er. Avinash Pandey November 20, 2008 at 2:20 PM  

@ Snigddha yes m learning HTML, mot as master as u Compu Engineers. :-)

Dr.Nishi Chauhan November 20, 2008 at 3:26 PM  

very nice seema jee good one
Regards

Dr.Nishi Chauhan November 20, 2008 at 3:27 PM  

@ Avinash ...this one is better, with read more option its better as lots of scrolling is avoided now...also try link bar instead of HTML log in.....

Anonymous,  November 20, 2008 at 3:40 PM  

सफर मैं जिंदिगी का ऐसे ख्वाबों से सजाता हूँ
तुम्हारी आरजू ने दर बदर भटका दिया मुझको ............
तुम्हारी जुस्तुजू से अपनी दुनिया को बसाता हूँ
कभी दरया के साहिल पे कभी मोजों की मंजिल पे........
तुम्हें मैं ढूँडने हर हर जगह अपने को पाता हूँ
हवा के दोष पर हो कि पानी की रवानी पे .............
sundar...
Regards
Sneha Pathak
Bhopal

Anonymous,  November 20, 2008 at 3:42 PM  

@ Avinash
Ur blog is very nice and ur Political view and Econmic analysis r really in-depth and useful...keep up the good work
Regards
Sneha Pathak

Er. Prachi Pandey November 20, 2008 at 4:57 PM  

मुझे अब यूँ ने तड़पाओ चली आओ चली आओ ......
चली आओ चली आओ चली आओ चली आओ
अगर उस पार हो तुम " मैं अभी कश्ती से आता हूँ .....
जहाँ हो तुम मुझे आवाज़ दो " मैं दूंढ लाता हूँ"...
Too good
Regards

Er. Prachi Pandey November 20, 2008 at 4:58 PM  

@ Avinash
This one is surely better ....agree with nishi,"Read More" make it look very even

Er. Nidhi Mishra November 20, 2008 at 6:15 PM  

best of all the poems i have read of urs seema jee
nicely written
Regards

Er. Nidhi Mishra November 20, 2008 at 6:16 PM  

@ Avinash. Surely a batter template

Anonymous,  November 20, 2008 at 6:51 PM  

very nice poem seems jee
Regards

Er. Avinash Pandey November 20, 2008 at 10:57 PM  

@ all team members and visitots, is any one havine prb viewing right hand side page element (viz categories,team members,blog archiving) are they some yime going below the posts instead of being on right hand side of posts...plz lemme knw if any one has such prb
Regards & Thx

Er. Paayal Sharma November 21, 2008 at 12:16 AM  

तुम्हें मैं ढूँडने हर हर जगह अपने को पाता हूँ
हवा के दोष पर हो कि पानी की रवानी पे .............
तुम्हारी याद में मैं अपनी हस्ती को भुलाता हूँ
मुझे अब यूँ ने तड़पाओ चली आओ चली आओ ......Beaituful,very lovely composition
Regards

Er. Puja Kapoor November 21, 2008 at 8:32 AM  

@ Avinash
No any problem as such...it migh happen bcoz of LT 6m mns or HTML error in template...good work any way

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