Expect nothing, live frugally on surprise.

Saturday, November 22, 2008

" आज फिर"



" आज फिर"

आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .

दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.

लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
आज फिर हमने अप्पने तबीयत बेहलाई है.

नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.

रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आयी है.

आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .

आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर दिल मे वही आग सुलग आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .

26 comments:

Dr. Pragya bajaj November 22, 2008 at 9:46 AM  

आज फिर हमने चाहा करें टूट कर प्यार तुम्हे ,
आज फिर दिल मे वही आग सुलग आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
bahot Khoob!!

Dr.Nishi Chauhan November 22, 2008 at 1:17 PM  

beautiful lines theses:-
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
pain flows from each n every word
Good
Regards

Dr.Nishi Chauhan November 22, 2008 at 1:18 PM  

@ Avinash...the prb vich u mentioned in mail is not wid HTML but wid mns 64 & 128...its local net fault

Anonymous,  November 22, 2008 at 1:18 PM  

beautiful
Ashok, Kota

Er. Prachi Pandey November 22, 2008 at 10:05 PM  

too good seema jee as always regards

Anonymous,  November 22, 2008 at 10:06 PM  

आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
waah!!!

Anonymous,  November 22, 2008 at 10:08 PM  

आज फिर हमने अप्पने तबीयत बेहलाई है.
नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,

Anonymous,  November 22, 2008 at 10:10 PM  

aap hamesha dukha bhare kavita kyu likete hai seema jee?
Sneha
Rajkot

Anonymous,  November 22, 2008 at 10:12 PM  

आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.
रहा नही वायदों और वफाओं का वजूद कोई,
आज फिर हर एक चोट उभर आयी है.
आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .

shabdo ka satik istamaal
Regards

Anonymous,  November 22, 2008 at 11:23 PM  

lovely poem
Reagrds

Anonymous,  November 22, 2008 at 11:24 PM  

आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
Wah ! Wah
Regards
Nitin Bala
Chennai

Er. Nidhi Mishra November 22, 2008 at 11:29 PM  

baeutiful seema jee....u r too good
Regards

Er. Nidhi Mishra November 22, 2008 at 11:30 PM  

@seemajee
thx 4 being part of dis blog we all are blessed 2 have poet like you
Regards

Anonymous,  November 22, 2008 at 11:30 PM  

good one these lines
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
लबों ने चाहा कर लें खामोशी से बातें हम,
आज फिर हमने अप्पने तबीयत बेहलाई है.
नज़र मचल गई है एक दीदार को तेरे
आज फिर तेरी तस्वीर नज़र आयी है.

Anonymous,  November 22, 2008 at 11:31 PM  

bahot khoob

Er. Avinash Pandey November 23, 2008 at 7:10 AM  

very nice one seema jee, as always
Regards

Anonymous,  November 23, 2008 at 7:16 AM  

आज फिर ये दो अखीयाँ भर आयी है,
आज फिर तेरी याद चली आए है .
दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम,
आज फिर हमने जख्मों की किताब उठाई है.
too good
Regards

Er. Snigddha Aggarwal November 23, 2008 at 7:54 AM  

liked it a lot seemajee...nice one as always....
Regards

Anonymous,  November 23, 2008 at 7:56 AM  

दिल ने कहा ताजा कर लें वो सारे गम
Wah...

seema gupta November 23, 2008 at 9:58 PM  

hi guys, m honourd to hav such motivating readers over here. Each n every words of yours are preceious gems for me. You all are so creative, energatic and loving that i hav no words to thank you. Just wana say keep this spirit always and wish you all Good luck. 'With lov and regard'

Er. Avinash Pandey November 24, 2008 at 6:23 AM  

@Seemajee Its our supreme gratification that you are part of this blog.We all are thankful & honoured to find you as part og this blog. Thanks & Regards

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