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Monday, December 1, 2008

"सरहदे-इश्क़"


"सरहदे-इश्क़"

है ये शो'ला के या चिंगारी है,
आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है ...
(आतश-अंगेज़ - आग भड़काने, उत्तेजित करने वाली
ज़िल्लत - अपमान, तिरस्कार
काइनात - दुनिया
क़ाइल - अभिभूत
वारी - न्योछावर )


19 comments:

Anonymous,  December 1, 2008 at 11:06 AM  

चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
well said mam
Regards

Anonymous,  December 1, 2008 at 11:09 AM  

well composed
Regards

Dr. Pragya bajaj December 1, 2008 at 11:27 AM  

दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है ...

Anonymous,  December 1, 2008 at 11:31 AM  

है ये शो'ला के या चिंगारी है,
आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
well written as always

Er. Puja Kapoor December 1, 2008 at 11:32 AM  

सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
nice one
regards

Anonymous,  December 1, 2008 at 11:44 AM  

well articulated
regards

Er. Snigddha Aggarwal December 1, 2008 at 3:46 PM  

सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है ...
well composed

Anonymous,  December 1, 2008 at 3:47 PM  

चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....

Anonymous,  December 1, 2008 at 4:24 PM  

हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है

Dr.Nishi Chauhan December 1, 2008 at 8:04 PM  

इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
nice as always
Regards

Dr. Palki Vajpayee December 1, 2008 at 10:07 PM  

इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
good one mam
Regards

Anonymous,  December 2, 2008 at 12:02 AM  

है ये शो'ला के या चिंगारी है,
आतश-अंगेज़ बेक़रारी है ...
यूँ निगाहों से ना गिराएँ हमें,
चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...

Anonymous,  December 2, 2008 at 12:06 AM  

सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
हमने क्या कर दिया जो क़ाइल हैं
आप पर जान ही तो वारी है ...

Er. Paayal Sharma December 2, 2008 at 12:09 AM  

चोट ज़िल्लत से भी करारी है ...
के शिकन आपके चेहरे पे पड़े
दिल पे अपने ये बात भारी है ...
सरहदें इश्क़ की न ठहराएँ
इश्क़ से काइनात हारी है ....
bahot khoob

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