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Thursday, December 4, 2008

"शब्दों की वादियाँ"


'शब्दों की वादियाँ"

शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण ,
जो सजा सके मनोभावों को,
चाहत के सुंदर साजों को,
लुकती छुपती अभिलाषा को,
नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............

17 comments:

Prachi Pandey,  December 4, 2008 at 3:38 PM  

लुकती छुपती अभिलाषा को,
नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,

Anonymous,  December 4, 2008 at 4:54 PM  

निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे

Er. Paayal Sharma,  December 4, 2008 at 5:13 PM  

नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को
nice

Anonymous,  December 4, 2008 at 5:20 PM  

नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
Good...Regards

Dr. Neha Srivastav,  December 4, 2008 at 7:31 PM  

विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............
too good mam
regards

Anonymous,  December 4, 2008 at 8:14 PM  

शब्दों की वादियों मे विचरता ये मन
nice as always
Thx & Regards
Sneha

Anonymous,  December 4, 2008 at 8:18 PM  

निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............
good lines mam, Regards

Anonymous,  December 4, 2008 at 8:59 PM  

another nice composition mam.....nice one
Regards

Anonymous,  December 4, 2008 at 10:58 PM  

लुकती छुपती अभिलाषा को,
नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,

Anonymous,  December 5, 2008 at 12:58 AM  

निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............
liked these lines most
Regards

अविनाश,  December 5, 2008 at 3:37 PM  

सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............
nice lines
Regards

Puja,  December 5, 2008 at 6:02 PM  

निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............

Anonymous,  December 5, 2008 at 6:28 PM  

नैनो मे दुबकी जिज्ञासा को,
सिमटी सकुचाई आशा को,
निश्चल प्रेम की भाषा को,
शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण............
Beautiful Lines Regards

Anonymous,  December 6, 2008 at 2:08 AM  

शब्दों की वादियों मे
विचरता ये मन ,
खोज रहा कुछ ऐसे कण ,
जो सजा सके मनोभावों को
sundar rachna
Dhanyavaad

Anonymous,  December 6, 2008 at 9:16 AM  

nice one mam

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