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Monday, February 9, 2009

"मै डरती हूँ "

मै जानती हूँ .........
मेरे खत का उसे इंतजार नही
मेरे दुख से उसे सरोकार नही ,

मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते
मेरी कोई बात भी उसे याद नही.
मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा
मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

32 comments:

अनु मिश्रा February 9, 2009 at 12:28 PM  

सुंदर रचना सीमाजी

Dr. Gunjan Gehlot February 9, 2009 at 12:29 PM  

बेहतरीन कविता. सुंदर और सफल प्रयास.
धन्यवाद

Dr. Gunjan Gehlot February 9, 2009 at 12:32 PM  

मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती

Puja February 9, 2009 at 1:05 PM  

बहुत अच्छा सीमा जी. सुंदर कविता.

Rohit Sharma February 9, 2009 at 1:26 PM  

पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा

How do we know February 9, 2009 at 4:55 PM  

Paschatap? kise? Use jo guzar chuka hai? Nahi hoga joi paschatap.

सुशील कुमार छौक्कर February 9, 2009 at 5:22 PM  

मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा
मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

बहुत ही सुदंर।

Ashok February 9, 2009 at 6:17 PM  

मेरी कोई बात भी उसे याद नही.
मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता

Ritu February 9, 2009 at 6:19 PM  

क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से

Ritu February 9, 2009 at 6:21 PM  

सीमाजी

हमेशा की तरह एक उम्दा कविता.
धन्यवाद

Er. Nidhi Mishra February 9, 2009 at 6:30 PM  

मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते
मेरी कोई बात भी उसे याद नही.
मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही

Dr.Rita Raman February 9, 2009 at 6:46 PM  

मेरे खत का उसे इंतजार नही
मेरे दुख से उसे सरोकार नही ,


मेरे मासूम लफ्ज उसे नही बहलाते
मेरी कोई बात भी उसे याद नही.

अनिल कान्त : February 9, 2009 at 7:06 PM  

उस अपने का ख्याल जिस तरह से आपने कविता में पिरोया है वो काबिले तारीफ़ है ....


मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Swati February 9, 2009 at 7:57 PM  

कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से

Prachi Pandey February 9, 2009 at 8:17 PM  

मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा
मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

इंतज़ार को बहुत ही अच्छे से आपने कविता मे पिरोया है. एक बेतरीन, दिल को छू लेने वाली कविता.
धन्यवाद

Dr.Nishi Chauhan February 9, 2009 at 8:46 PM  

विरह और इंतज़ार की बेला और सुंदर ढंग से कविता के माध्यम से आपने व्यक्त किया. बहुत अच्छा लगा सीमा जी.
धन्यवाद

Dr. Aradhna February 9, 2009 at 9:33 PM  

मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही

Dr. Pragya bajaj February 10, 2009 at 12:34 AM  

क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा

creativekona February 10, 2009 at 12:35 AM  

कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
Seema ji,
bahut hee khoobsooratee ke sath apne is kavita men viyog kee manah sthiti ko shabdon men sanjoya hai.
Hemant Kumar

Er. Paayal Sharma February 10, 2009 at 12:38 AM  

क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से

Dr. Palki Vajpayee February 10, 2009 at 12:40 AM  

जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा
मै डरती हूँ ....बस उस एक पल से

Ritika Pandey February 10, 2009 at 12:54 AM  

सुन्‍दर कविता सीमाजी, दिल की बेताबी को बहुत सुंदरढंग से आपने कविता के मध्यम से व्यक्त किया है.

Shilpi Verma February 10, 2009 at 1:04 AM  

पश्चाताप के तूफानी सैलाब से
गुजर नही पायेगा ...जड हो जाएगा

Austeen Sufi February 10, 2009 at 1:11 AM  

मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती


sundar seema jee

Richa Saxena February 10, 2009 at 9:07 AM  

उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से

Ria Taneja February 10, 2009 at 9:10 AM  

मेरी कोई बात भी उसे याद नही.
मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता

seema gupta February 10, 2009 at 9:44 AM  

" hi all.....thanks a lot for your encouragement with your words and thoughts..."

regards

Dr.Ruchika Rastogi February 10, 2009 at 2:00 PM  

कोई आहट उसे नही चौंकाती
क्योंकि उसे मेरा इन्तजार नही
मगर मै डरती हूँ उस पल से
जब वो चेतना में लौटेगा और
पश्चाताप के तूफानी सैलाब से

Jyoti Dixit February 10, 2009 at 4:48 PM  

मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही

Ria Taneja February 10, 2009 at 6:48 PM  

मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती

Kanupriya February 10, 2009 at 7:26 PM  

मेरे ख्वाबों से उसकी नींद नही उचटती
मेरी यादो मे उसके पल बर्बाद नही
मेरा कोई आंसू उसे नही रुलाता
उसे मुझसे जरा भी प्यार नही
कोई आहट उसे नही चौंकाती

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