Expect nothing, live frugally on surprise.

Monday, February 23, 2009

"झील को दर्पण बना"

रात के स्वर्णिम पहर में

झील को दर्पण बना
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी...

मस्त पवन की अंगडाई
दरख्तों के झुरमुट में छिप कर
परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....

नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

दूर बजती किसी बंसी की धुन
पायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी.....

24 comments:

Er. Snigddha Aggarwal February 23, 2009 at 11:43 AM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

Dr.Nishi Chauhan February 23, 2009 at 1:02 PM  

बेहतरीन रचना सीमा जी, सुंदर
धन्यवाद

Anonymous,  February 23, 2009 at 1:04 PM  

वाह क्या बात है, सुंदर रचना
शुक्रिया

Dr. Aradhna February 23, 2009 at 1:11 PM  

सुंदर रचना सीमाजी
धन्यवाद

Dr. Gunjan Gehlot February 23, 2009 at 1:41 PM  

वाह! बहुत सुंदर कविता

Tripti Pandey February 23, 2009 at 3:13 PM  

नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....

Dr.Ruchika Rastogi February 23, 2009 at 4:33 PM  

रात के स्वर्णिम पहर में
झील को दर्पण बना
चाँद जब बादलो से निकल
श्रृंगार करता होगा
चांदनी का ओढ़ आँचल
धरा भी इतराती तो होगी

Shweta Saxena February 23, 2009 at 5:11 PM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

Shweta Saxena February 23, 2009 at 5:13 PM  

सुंदर रचना सीमा जी, आपकी कविताओ मे बहुत भावनाए होती है.
ध्नयवाद

Amrita Kumari February 23, 2009 at 6:26 PM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

Shilpi February 23, 2009 at 7:10 PM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

Hobo ........ ........ ........ February 23, 2009 at 9:09 PM  

baatein bhul jaati hai
yaadein yaad aati hai...
:)

Ritika Pandey February 23, 2009 at 10:21 PM  

सुन्‍दर रचना सीमाजी, एक बेतरीन कविता
शुक्रिया

Ashok February 24, 2009 at 12:54 AM  

नदिया पुरे वेग मे बह
किनारों से टकरा टकरा
दीवाने दिल के धड़कने का
सबब सुनाती तो होगी .....

Aarti February 24, 2009 at 2:20 PM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी

sundar seemajee

Ria February 24, 2009 at 3:17 PM  

मस्त पवन की अंगडाई
दरख्तों के झुरमुट में छिप कर
परिधान बदल बदल
मन को गुदगुदाती तो होगी.....

Radhika February 24, 2009 at 10:11 PM  

दूर बजती किसी बंसी की धुन
पायल की रुनझुन और सरगम
अनजानी सी कोई आहट आकर
तुम्हे मेरी याद दिलाती तो होगी

creativekona February 24, 2009 at 11:33 PM  

Seema ji ,
bahut sundar geet. man kee bhavnaon men shabdon ke pankh lagane kee kala apke geeton ko khoobsooratee pradan kartee hai.
Hemant Kumar

Anouska Awasthi February 25, 2009 at 10:01 AM  

खामोशी की आगोश मे
रात जब पहरों में ढलती होगी
ओस की बूँदें दूब के बदन पे
फिसल लजाती तो होगी ......

  © Free Blogger Templates Blogger Theme by Ourblogtemplates.com 2008

Back to TOP